स्टॉक और प्रवाह, NPA को लेकर RBI के नए नियम Thu 10, 2018

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-2: शासन व्यवस्था, संविधान, शासन प्रणाली, सामाजिक न्याय तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध। (खंड- 10 : सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय) (खंड- 15 : शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष, ई-गवर्नेंस-अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएँ, सीमाएँ और संभावनाएँ; नागरिक चार्टर, पारदर्शिता एवं जवाबदेही और संस्थागत तथा अन्य उपाय)

संदर्भ

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की पाँच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने अपने एक निर्णय में आधार योजना को संवैधानिक रूप से मान्य माना है। हालाँकि, सर्वोच्च न्यायालय की इस पीठ ने आधार अधिनियम के संबंध में कई प्रावधान भी किये हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद निजता के अधिकार को मूल अधिकार बना दिया गया था जिसके परिणामस्वरूप आधार को आलोचकों और विभिन्न कार्यकर्त्ताओं द्वारा नागरिकों की गोपनीयता पर घुसपैठ के रूप में पेश किया गया था। पाँच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ में से चार ने हाल ही में फैसला दिया है कि इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन को सक्षम बनाने वाला कानून नागरिकों की गोपनीयता के अधिकार का उल्लंघन नहीं करता है, बल्कि यह परियोजना हाशिये वाले वर्गों को प्रौद्योगिकी का लाभ उठाकर विभिन्न सेवाओं, लाभ और सब्सिडी को प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कुछ मुख्य विशेषताएँ

  • सुप्रीम कोर्ट ने आधार की वैधता को बरकरार रखते हुए कहा है कि डेटा की सुरक्षा के लिये पर्याप्त सुरक्षा उपाय किये गए हैं और आधार के द्वारा नागरिकों की निगरानी शुरू करना मुश्किल है।
  • मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई में पाँच न्यायाधीशीय खंडपीठ ने सरकार से अधिक सुरक्षा उपाय प्रदान करने के साथ-साथ डेटा के भंडारण की अवधि को कम करने के लिये कहा।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बैंक खाता खोलने और मोबाइल कनेक्शन प्राप्त करने के लिये आधार अनिवार्य नहीं किया जा सकता है।
  • इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि स्कूल में दाखिला लेने के लिये आधार को अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिये और प्रशासन इसे अनिवार्य नहीं बना सकता है।
  • हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने के लिये आधार और पैन को अनिवार्य बना दिया है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिये अवैध प्रवासियों को आधार जारी नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि निजी कंपनियाँ आधार की मांग नहीं कर सकती हैं।
  • उल्लेखनीय है कि आधार की संवैधानिक वैधता पर फैसला सुनाने के दौरान न्यायाधीश सिकरी ने कहा कि आधार कार्ड और पहचान के बीच एक मौलिक अंतर यह बना हुआ है कि इसमें एक बार बायोमीट्रिक जानकारी संग्रहीत होने के बाद, यह सिस्टम में बनी रहती है। साथ ही, आधार एक अद्वितीय पहचान है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने आधार कानून के उस प्रावधान को इज़ाज़त दे दी है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर डेटा साझा करने की बात शामिल है।
  • आधार समाज के हाशिये वाले वर्गों को सशक्त बनाना है और उन्हें एक पहचान देता है। न्यायमूर्ति सिकरी ने कहा है कि "सर्वोत्तम होने की बजाय अद्वितीय होना बेहतर है” और आधार आनुपातिकता के सिद्धांत को पूरा करता है।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का हालिया निर्णय न केवल आधार के दायरे को बताता है, बल्कि एक ढाँचा भी प्रदान करता है जिसके अंतर्गत यह काम कर सकता है। यह आधार से जुड़े विभिन्न विवादास्पद मुद्दों जैसे- आधार से जुड़े नागरिकों के गोपनीय डेटा की सुरक्षा को सुनिश्चित करने हेतु सरकार को दिशा-निर्देशित करने के साथ ही राजनीतिक प्रभुत्व, ताकत का प्रभाव और अथॉरिटी से भी आम नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करता है। हालाँकि, इस संबंध में जिन बिंदुओं पर न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने विरोध में फैसला दिया है उन पर भी गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।